Monday, 21 August 2023
आज भारत के टार्जन यानि अभिनेता हेमंत बिर्जे जी का जन्मदिन है। आज ही के दिन यानि 19 अगस्त को सन 1965 में हेमंत बिर्जे का जन्म हुआ था। हेमंत जी जब फिल्म इंडस्ट्री में नए-नए आए थे तब कितने ही बड़े नाम थे जिन्होंने इन्हें पीछे धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। क्योंकि उनमें से कुछ मुझे भी पसंद हैं। व बाकी लोगों को भी पसंद आते होंगे। लेकिन एक शख्स था जिसने हेमंत को बहुत सपोर्ट किया था। वो शख्स था अपने मिथुन दा। हेमंत खुद कहते हैं कि मिथुन दा हमेशा उन्हें अपने छोटे भाई की तरह सपोर्ट करते थे। लेकिन अकेले मिथुन दा का सपोर्ट हेमंत के काम ना आ सका। ज़ाहिर है, मिथुन दा को अपना करियर व अपना जीवन भी देखना था। नतीजा ये हुआ कि हेमंत बिर्जे कभी भी ए ग्रेड कलाकार ना बन सके। बी ग्रेड फिल्मों तक ही महदूद रह गए। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में अगर किसी के खिलाफ लॉबींग होने लगे तो वो कितना भी टैलेंटेड क्यों ना हो, उसको सफलता मिल ही नहीं सकती। हेमंत बिर्जे को किस्सा टीवी की तरफ से जन्मदिन की अनेकों अनेक शुभकामनाएं। #hemantbirje #happybirthday #desitarzan
आज भारत के टार्जन यानि अभिनेता हेमंत बिर्जे जी का जन्मदिन है। आज ही के दिन यानि 19 अगस्त को सन 1965 में हेमंत बिर्जे का जन्म हुआ था। हेमंत जी जब फिल्म इंडस्ट्री में नए-नए आए थे तब कितने ही बड़े नाम थे जिन्होंने इन्हें पीछे धकेलने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा। क्योंकि उनमें से कुछ मुझे भी पसंद हैं। व बाकी लोगों को भी पसंद आते होंगे। लेकिन एक शख्स था जिसने हेमंत को बहुत सपोर्ट किया था। वो शख्स था अपने मिथुन दा। हेमंत खुद कहते हैं कि मिथुन दा हमेशा उन्हें अपने छोटे भाई की तरह सपोर्ट करते थे। लेकिन अकेले मिथुन दा का सपोर्ट हेमंत के काम ना आ सका। ज़ाहिर है, मिथुन दा को अपना करियर व अपना जीवन भी देखना था। नतीजा ये हुआ कि हेमंत बिर्जे कभी भी ए ग्रेड कलाकार ना बन सके। बी ग्रेड फिल्मों तक ही महदूद रह गए। आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि फिल्म इंडस्ट्री में अगर किसी के खिलाफ लॉबींग होने लगे तो वो कितना भी टैलेंटेड क्यों ना हो, उसको सफलता मिल ही नहीं सकती। हेमंत बिर्जे को किस्सा टीवी की तरफ से जन्मदिन की अनेकों अनेक शुभकामनाएं।
Sunday, 20 August 2023
एक राजा की कहानी
एक दिन की बात है, एक समय की बात है, एक देश में एक बड़े ही शांतिपूर्ण और समृद्ध राजा राज्य करते थे। उनका नाम राजा सुखदेव था। राजा सुखदेव का धर्म, न्याय और सेवा करने का दृढ़ संकल्प था।
वे अपने प्रजाओं के लिए हमेशा तत्पर रहते थे और उनकी समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रयत्नशील रहते थे। उन्होंने राज्य के विकास के लिए विभिन्न सुविधाएँ प्रदान की और गरीबों और असहाय लोगों की मदद की।
एक बार, राजा सुखदेव ने अपने दरबार में एक साधु को बुलवाया और उनसे सलाह मांगी कि कैसे वे अपने राज्य को और भी उन्नत और समृद्ध बना सकते हैं। साधु ने राजा से कहा कि सच्चे राजा वो होते हैं जो अपने प्रजाओं की सुनते हैं और उनकी तरक्की के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।
राजा सुखदेव ने उस साधु की सलाह को मानकर और अपने धर्म के मार्ग पर चलते हुए अपने राज्य को और भी सुखमय बनाने के लिए कई नए प्रोजेक्ट्स शुरू किए। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, और उद्यमिता के क्षेत्र में सुविधाएँ प्रदान की, जिससे उनके राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ।
घोड़े और गधे की कहानी, Ghode Aur Gadhe Ki Kahani
घोड़े और गधे की कहानी, Ghode Aur Gadhe Ki Kahani
एक आदमी के पास एक घोड़ा और एक गधा था। एक दिन वह इन दोनों को लेकर बाजार जा रहा था। उसने गधे की पीठ पर खूब सामान लादा था। घोड़े की पीठ पर कोई सामान नहीं था।रास्ते में गधे ने घोड़े से कहा, भाई मेरी पीठ पर बहुत ज्यादा वजन है। थोड़ा बोझ तुम भी अपनी पीठ पर ले लो।
घोड़े ने कहा, बोझ ज्यादा हो या कम, मुझे इससे कुछ लेना-देना नहीं है। यह बोझ तुम्हारा है और इसे तुम्हें ही उठाकर चलना है। मुझसे इसके बारे में कुछ मत कहो। यह सुनकर गधा चुप हो गया। फिर वे तीनों चुपचाप चलने लगे। थोड़ी देर बाद भारी बोझ के कारण गधे के पाँव लड़खड़ाने लगे और वह रास्ते पर गिर पड़ा। उसके मुँह से झाग निकलने लगा।इसके बाद उस आदमी ने गधे की पीठ से सारा सामान उतार दिया।उसने यह सारा बोझ घोड़े की पीठ पर लाद दिया।
चलते-चलते घोड़ा सोचने लगा, यदि मैंने गधे का कुछ भार अपनी पीठ पर ले लिया होता, तो कितना अच्छा होता। अब मुझे सारा बोझ उठाकर बाजार तक ले जाना पड़ेगा।
शिक्षा -दूसरों के दुःख-दर्द में हाथ बँटाने से हमारा दुःख-दर्द भी कम हो
कहानी : बकरी की सहेलियां (दोस्ती की परख)
एक बार की बात है, एक बकरी थी। वो बहुत खुशी-खुशी अपने गांव में रहती थी। वो बहुत मिलनसार थी। बहुत सारी बकरियां उसकी सहेलियां थीं। उसकी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। वो सभी से बात कर लेती थी और सभी को अपना दोस्त मान लेती थी।
सभी कुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन एक बार वो बकरी बीमार पड़ी और इस कारण वह धीरे-धीरे कमजोर होने लगी इसलिए अब वो पूरा-पूरा दिन घर पर ही बिताने लेगी। बकरी ने जो खाना पहले से अपने लिए जमा करके रखा था, अब वो भी खत्म होते जा रहा था।
एक दिन उसकी कुछ बकरी सहेलियां उसका हाल-चाल पूछने उसके पास आईं, तब ये बकरी बड़ी खुश हुई। इसने सोचा कि अपनी सहेलियों से कुछ और दिनों के लिए वह खाना मंगवा लेगी। लेकिन वे बकरियां तो उससे मिलने के लिए अंदर आने से पहले ही उसके घर के बाहर रुक गईं और उसके आंगन में रखा उसका खाना घास-फूस खाने लगीं।
ये देखकर अब इस बकरी को बहुत बुरा लगा और समझ में आ गया कि उसने अपने जीवन में क्या गलती की? अब वो सोचने लगी कि काश! हर किसी को अपने जीवन का हिस्सा व दोस्त बनाने से पहले उसने उन्हें थोड़ा परख लिया होता है, तो अब इस बीमारी में उसकी मदद के लिए कोई तो होता।click here
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